Category: Uncategorized
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इतनी ख़ामोशी से निकले!
इतनी ख़ामोशी से निकले हैं तिरे शोर से हम,जैसे बाज़ार के मजमा’ से जनाज़ा निकले| इब्राहीम अली ज़ीशान
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जेब से नक़्शा निकले!
तेरी राहों में भटकते हुए मौत आ जाए,और ऐसे में मिरी जेब से नक़्शा निकले| इब्राहीम अली ज़ीशान
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दिल की नज़र से!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है यह गीत- दिल की नज़र से!फ़िल्म- अनाड़ीकलाकार – राज कपूर, नूतनगीतकार- शैलेंद्रसंगीतकार- शंकर जयकिशनगायक- मुकेश, लता मंगेशकरप्रस्तुति-श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । ******
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पिता और कविता!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री रामकुमार कृषक जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। कृषक जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। मुझे याद है लगभग 50 वर्ष पहले जब मैं दिल्ली में तब उनके साथ कुछ काव्य गोष्ठियों में भाग लिया था। आज प्रस्तुत है श्री रामकुमार कृषक जी…
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तू ने आवाज़ लगाई !
जंग में कौन निकलता है घरों से बाहर,तू ने आवाज़ लगाई थी लिहाज़ा निकले| इब्राहीम अली ज़ीशान
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दश्त से ज़िंदा निकले!
वर्ना हम कब के चटानों में फँसे मर जाते,पाँव काटे तो तिरे दश्त से ज़िंदा निकले| इब्राहीम अली ज़ीशान
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मोहब्बत एक खुशबू है, हमेशा साथ चलती है!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में बशीर बद्र जी का एक और शेर – आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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मोहब्बत का नतीजा निकले!
तू मुझे याद करे ऐसा तरीक़ा निकले,मेरी यक-तरफ़ा मोहब्बत का नतीजा निकले इब्राहीम अली ज़ीशान
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ये नयन डरे-डरे, ये जाम भरे-भरे!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में फिल्म-कोहरा का गीत जिसे कैफी आज़मी जी ने लिखा था और हेमंत कुमार जी ने अपने ही संगीत निर्देशन में गाया था- आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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जब नींद नहीं आती होगी!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय रामेश्वर शुक्ल अंचल जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। अंचल जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामेश्वर शुक्ल अंचल जी की यह कविता – क्या तुम भी सुधि से थके प्राण ले-लेकर अकुलाती होगी!जब नींद नहीं आती होगी! दिनभर…