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एक ये दिन जब जागी रातें !
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में जावेद अख़्तर जी का एक और शेर, ये शेर जो मैं क्रमशः प्रस्तुत कर रहा हूँ इनको जगजीत सिंह जी ने भी गाया है- एक ये दिन जब जागी रातें दीवारों को तकती हैं! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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हम साथ तो हैं पर!
नदी के दो किनारों की तरह हम साथ तो हैं पर,कभी साहिल के सीना से अजी साहिल नहीं लगता| राज़ देहलवी
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इन आंखों की मस्ती के!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मेरे स्वर में प्रस्तुत है यह गीत- इन आंखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं!अभिनेता- रेखा, फारुख शेख, राज बब्बर आदिफ़िल्म- उमराव जानगीतकार- शहरयारसंगीतकार- खय्यामगायिका- आशा भोसलेप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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खुला रहने दो!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी साहित्यकार एवं कवि स्वर्गीय रांगेय राघव जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।रांगेय राघव जी की अधिक रचनाएं मैंने शायद पहले शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रांगेय राघव जी की यह कविता – गगन निविड़ घाटीमुझे मिली भूमि सघन माटी;उगी कली बंद,जीवन का छंद रस-लहरी साकार, गंध…
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वगर्ना ये जहाँ तो !
तुम्हारी मुस्कुराहट के लिए जीना ज़रूरी है,वगर्ना ये जहाँ तो जीने के क़ाबिल नहीं लगता| राज़ देहलवी
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एक ये दिन जब!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मेरे स्वर में प्रस्तुत है जावेद अख़्तर जी का एक और शेर, जिस ग़ज़ल से मैं क्रमशः प्रस्तुत कर रहा हूँ उसको जगजीत सिंह जी ने गाया है- एक ये दिन जब सारी सड़कें रूठी रूठी लगती हैं! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । ******
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ख़ुदा की बात करता है!
ख़ुदा की बात करता है बिना ज़िक्र-ए-मोहब्बत के,तू वाइज़ हो गया है पर अभी फ़ाज़िल नहीं लगता| राज़ देहलवी