Category: Uncategorized
-
पंजिम से पेंजेन्स!
जैसा मैंने पहले बताया है इस समय हम लंदन के अपने तीसरे प्रवास पर हैं, बेटे के घर पर| इस सप्ताहांत में एक बार फिर हम बाहर घूमने गए, यह यात्रा लंदन से बाहर की थी| सामान्यतः हम भारत में गोवा के पंजिम नगर में रहते हैं, समुद्र के किनारे और इस सप्ताहांत में हम…
-
अब अंदर जाकर देख!
तू भी ‘मुनीर’ अब भरे जहाँ में मिल कर रहना सीख, बाहर से तो देख लिया अब अंदर जाकर देख| मुनीर नियाज़ी
-
नक़्श बना कर देख!
शायद कोई देखने वाला हो जाए हैरान, कमरे की दीवारों पर कोई नक़्श बना कर देख| मुनीर नियाज़ी
-
पास बुला कर देख!
दरवाज़े के पास आ आ कर वापस मुड़ती चाप, कौन है इस सुनसान गली में पास बुला कर देख| मुनीर नियाज़ी
-
दिया जला कर देख!
शाम है गहरी तेज़ हवा है सर पे खड़ी है रात, रस्ता गए मुसाफ़िर का अब दिया जला कर देख| मुनीर नियाज़ी
-
आँख मिला कर देख!
तुझसे बिछड़ कर क्या हूँ मैं अब बाहर आ कर देख, हिम्मत है तो मेरी हालत आँख मिला कर देख| मुनीर नियाज़ी
-
अन-कहे सवाल की!
देख के मुझ को ग़ौर से फिर वो चुप से हो गए, दिल में ख़लिश है आज तक इस अन-कहे सवाल की| मुनीर नियाज़ी
-
उस परी-जमाल की!
उम्र के साथ अजीब सा बन जाता है आदमी, हालत देख के दुख हुआ आज उस परी-जमाल की| मुनीर नियाज़ी
-
मेरे किसी ख़याल की!
शाम झुकी थी बहर पर पागल हो कर रंग से, या तस्वीर थी ख़्वाब में मेरे किसी ख़याल की| मुनीर नियाज़ी