Category: Uncategorized
-
धूप से नफ़रत उसे भी थी!
तन्हा हुआ सफ़र में तो मुझ पे खुला ये भेद, साए से प्यार धूप से नफ़रत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी
-
हर साँस क़यामत उसे भी थी!
वो मुझसे बढ़ के ज़ब्त का आदी था जी गया, वर्ना हर एक साँस क़यामत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी
-
कितना अच्छा होता है!
आज फिर से मैं हिन्दी के विख्यात कवि तथा साप्ताहिक समाचार पत्रिका ‘दिनमान’ के संपादन से जुड़े रहे स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सर्वेश्वर जी की अपनी विशिष्ट शैली रही है और उन्होंने कुछ कालजयी रचनाएं की हैं| उनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|…
-
शहर-भर से अदावत उसे भी थी!
मुझ से बिछड़ के शहर में घुल-मिल गया वो शख़्स, हालाँकि शहर-भर से अदावत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी
-
शौक़ था नए चेहरों की दीद का!
मुझ को भी शौक़ था नए चेहरों की दीद का, रस्ता बदल के चलने की आदत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी
-
किसी से मोहब्बत उसे भी थी!
ज़िक्र-ए-शब-ए-फ़िराक़ से वहशत उसे भी थी, मेरी तरह किसी से मोहब्बत उसे भी थी| मोहसिन नक़वी
-
कई बार चराग़ों को बुझा कर!
इस शब के मुक़द्दर में सहर ही नहीं ‘मोहसिन’, देखा है कई बार चराग़ों को बुझा कर| मोहसिन नक़वी
-
दुश्मन की भी पहचान कहाँ है!
ऐ दिल तुझे दुश्मन की भी पहचान कहाँ है, तू हल्क़ा-ए-याराँ में भी मोहतात* रहा कर|*मोहित मोहसिन नक़वी
-
कभी रो भी लिया कर!
हर वक़्त का हँसना तुझे बर्बाद न कर दे, तन्हाई के लम्हों में कभी रो भी लिया कर| मोहसिन नक़वी