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प्रार्थना की कड़ी!
लंबे समय के बाद आज एक बार फिर से मैं साहित्य की सभी विधाओं में अपना योगदान करने वाले विख्यात कवि और ‘धर्मयुग’ के यशस्वी संपादक स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| भारती जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती…
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वफ़ा साथ लिए जा!
शामिल है मिरा ख़ून-ए-जिगर तेरी हिना में, ये कम हो तो अब ख़ून-ए-वफ़ा साथ लिए जा| साहिर लुधियानवी
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घटा साथ लिए जा!
तपती हुई राहों से तुझे आँच न पहुँचे, दीवानों के अश्कों की घटा साथ लिए जा| साहिर लुधियानवी
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जो तुझे सौंप दिया था!
इक दिल था जो पहले ही तुझे सौंप दिया था, ये जान भी ऐ जान-ए-अदा साथ लिए जा| साहिर लुधियानवी
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दुआ साथ लिए जा!
बरबाद-ए-मोहब्बत की दुआ साथ लिए जा, टूटा हुआ इक़रार-ए-वफ़ा साथ लिए जा| साहिर लुधियानवी
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बहुत जी लिया मैंने!
बस अब तो दामन-ए-दिल छोड़ दो बेकार उम्मीदो, बहुत दुख सह लिए मैंने, बहुत दिन जी लिया मैंने| साहिर लुधियानवी
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खोकर जी लिया मैंने!
उन्हें अपना नहीं सकता मगर इतना भी क्या कम है, कि कुछ मुद्दत हसीं ख़्वाबों में खोकर जी लिया मैंने| साहिर लुधियानवी
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सहारे जी लिया मैंने!
अभी ज़िंदा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ ख़ल्वत में, कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैंने| साहिर लुधियानवी
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ये भी पी लिया मैंने!
मोहब्बत तर्क की मैंने गरेबाँ सी लिया मैंने, ज़माने अब तो ख़ुश हो ज़हर ये भी पी लिया मैंने| साहिर लुधियानवी
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कविता!
आज एक बार फिर से मैं अपनी किस्म के अनूठे कवि स्वर्गीय सुदामा प्रसाद पांडे ‘धूमिल’ जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| धूमिल जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धूमिल जी की यह कविता, जो कविता के बारे में ही है – उसे मालूम है…