Category: Uncategorized
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इनायत कभी कभी!
मिलती है ज़िंदगी में मोहब्बत कभी कभी, होती है दिलबरों की इनायत कभी कभी| साहिर लुधियानवी
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निबाह रहा हो रक़ीब से
इस तरह ज़िंदगी ने दिया है हमारा साथ, जैसे कोई निबाह रहा हो रक़ीब से| साहिर लुधियानवी
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इस रेंगती हयात का
इस रेंगती हयात का कब तक उठाएँ बार, बीमार अब उलझने लगे हैं तबीब से| साहिर लुधियानवी
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देखा है ज़िंदगी को!
देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से, चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से| साहिर लुधियानवी
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तांडव!
हमारे राष्ट्रकवि के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले और हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि, जो सांसद रहे थे और कवि सम्मेलनों की शान हुआ करते थे, ऐसे स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| दिनकर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत…
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जाग उट्ठी ज़िंदगानी!
अँधेरे ढल गए रौशन हुए मंज़र ज़मीं जागी फ़लक जागा, तो जैसे जाग उट्ठी ज़िंदगानी, मगर कुछ याद-ए-माज़ी ओढ़ के सोए हुए लोगों को लगता है जगाने में अभी कुछ दिन लगेंगे| जावेद अख़्तर
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नए रस्ते बनाने में!
पुरानी मंज़िलों का शौक़ तो किसको है बाक़ी, अब नई हैं मंज़िलें हैं सबके दिल में जिनके अरमाँ, बना लेना नई मंज़िल न था मुश्किल मगर ऐ दिल, नए रस्ते बनाने में अभी कुछ दिन लगेंगे| जावेद अख़्तर