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हड्डियाँ उड़ जाएँ!
ज़मीं से एक तअल्लुक़ ने बाँध रक्खा है, बदन में ख़ून नहीं हो तो हड्डियाँ उड़ जाएँ| राहत इंदौरी
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बस्तियाँ उड़ जाएँ!
ख़ुदा का शुक्र कि मेरा मकाँ सलामत है, हैं उतनी तेज़ हवाएँ कि बस्तियाँ उड़ जाएँ| राहत इंदौरी
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सर्दियाँ उड़ जाएँ!
ये सर्द रातें भी बनकर अभी धुआँ उड़ जाएँ, वो इक लिहाफ़ मैं ओढूँ तो सर्दियाँ उड़ जाएँ| राहत इंदौरी
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दिल है तुम्हारा फूल सा
बे-कार जी पे बोझ लिए फिर रहे हो तुम, दिल है तुम्हारा फूल सा अफ़्सोस मत करो| बशीर बद्र
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फिर से ख़ुदा मिलाएगा!
वो तुमसे आज दूर है कल पास आएगा, फिर से ख़ुदा मिलाएगा अफ़्सोस मत करो| बशीर बद्र
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फूलों पे तितलियाँ!
ये देखो फिर से आ गईं फूलों पे तितलियाँ, इक रोज़ वो भी आएगा अफ़्सोस मत करो| बशीर बद्र
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रीती गागर का क्या होगा!
आज फिर से मैं जिनको हिन्दी में गीतों के राजकुंवर के नाम से जाना जाता है, ऐसे स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी कवि सम्मेलनों की शान हुआ करते थे और हिन्दी फ़िल्मों के लिए भी उन्होंने कुछ अमर गीत लिखे हैं| नीरज जी की कुछ रचनाएं…
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कई क़र्ज़ हैं मगर!
इस ज़िंदगी के मुझ पे कई क़र्ज़ हैं मगर, मैं जल्द लौट आऊँगा अफ़्सोस मत करो| बशीर बद्र