Category: Uncategorized
-
कलम और कुदाली!
आज एक बार मैं हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार श्री रामदरश मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| मिश्र जी ने साहित्य की सभी विधाओं में अपना अमूल्य योगदान किया है| मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री रामदरश मिश्र जी की यह कविता…
-
तेरा भी इख़्तियार नहीं!
ये किस मक़ाम पे पहुँचा दिया ज़माने ने, कि अब हयात पे तेरा भी इख़्तियार नहीं| साहिर लुधियानवी
-
मुझे ख़ुद अपनी !
तुम्हारे अहद-ए-वफ़ा को मैं अहद क्या समझूँ, मुझे ख़ुद अपनी मोहब्बत पे ए‘तिबार नहीं| साहिर लुधियानवी
-
ख़ुश-गवार नहीं!
अभी न छेड़ मोहब्बत के गीत ऐ मुतरिब, अभी हयात का माहौल ख़ुश-गवार नहीं| साहिर लुधियानवी
-
तेरा इंतिज़ार नहीं!
हवस-नसीब नज़र को कहीं क़रार नहीं, मैं मुंतज़िर हूँ मगर तेरा इंतिज़ार नहीं| साहिर लुधियानवी
-
घटता-बढ़ता देखते हैं!
तुझ को तो हर शाम फ़लक पर घटता-बढ़ता देखते हैं, उस को देख के ईद करेंगे अपना और इस्लाम है चाँद| इब्न-ए-इंशा
-
तू भी तमाम है चाँद!
अपने दिल के मश्रिक-ओ-मग़रिब उसके रुख़ से मुनव्वर हैं, बे-शक तेरा रूप भी कामिल बे-शक तू भी तमाम है चाँद| इब्न-ए-इंशा
-
भीगी शाम है चाँद!
हम से भी दो बातें कर ले कैसी भीगी शाम है चाँद, सब कुछ सुन ले आप न बोले तेरा ख़ूब निज़ाम है चाँद| इब्न-ए-इंशा
-
तुमने कितनी निर्दयता की!
आज एक बार मैं हिन्दी फिल्मों और काव्य मंचों के माध्यम से सैंकड़ों अमर गीत देने वाले स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का यह गीत – तुमने…