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जो जिगर के पार होता!
कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को,ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता| मिर्ज़ा ग़ालिब
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देश-परदेस-परदेसी – गीत यात्रा
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत हैं मेरे स्वर में शायरी और फिल्मी गीत , देश-परदेश और परदेसी विषयों से संबंधित – आशा है आपको यह पसंद आएंगे,धन्यवाद। ******
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ये रात भीगी भीगी!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- ये रात भीगी भीगी ये मस्त फ़िज़ाएं!फिल्म- चोरी चोरी का गीत मुख्य कलाकार- राज कपूर, नर्गिस गीतकार- शैलेंद्र संगीतकार- शंकर जयकिशन गायक- लता मंगेशकर, मन्ना डे प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। ******
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तिरे वा’दे पर जिए हम!
तिरे वा’दे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना,कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ए’तिबार होता| मिर्ज़ा ग़ालिब
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होश आया तो सभी!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह शेर-होश आया तो सभी ख्वाब थे रेज़ा रेज़ा!शायर- अहमद फराज गायक- ग़ुलाम अली आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । ******
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जुबिली स्टार राजेंद्र कुमार जी की याद
अपनी इस यूट्यूब लाइव प्रस्तुति में मैंने जुबिली स्टार कहे जाने वाले लोकप्रिय अभिनेता राजेंद्र कुमार जी को उनके द्वारा अभिनीत कुछ गीतों के माध्यम से याद किया। उनके कुछ गीतों के मुखडे और कुछ पूरे गीत भी मैंने अपने स्वर में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद।…
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एक परदेसी मेरा दिल ले गया!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- एक परदेसी मेरा दिल ले गया, जाते जाते मीठा मीठा ग़म दे गया !फिल्म- फागुन मुख्य कलाकार- भारत भूषण, मधुबालागीतकार- क़मर जलालाबादी संगीतकार- ओ . पी. नैयर गायक- मोहम्मद रफ़ी, आशा भोसले प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद…
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कुछ दिन रहे छलावे में हम!
प्रस्तुत है आज की यह रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- कुछ दिन रहे छलावे में हमकुछ दिन रहे भुलावे में,कुछ तो सच है साथ चल रहेलोगों के इस दावे में। मंज़िल की लालसा हमेशाहम भी रखते रहे मगरभटके रहे अधिकतर हम बसमौसम के बहकावों में. सुनते हैं सबकी बातें हमपूरे ध्यान सहित लेकिनहमें खींच…
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पंकज उधास जी की यादें!
मैंने अपनी यूट्यूब लाइव प्रस्तुति में पंकज उधास जी का स्मरण उनकी गायी ग़ज़लों और गीतों के माध्यम से करने का प्रयास किया, इसकी प्रति आपके अवलोकन/श्रवण हेतु प्रस्तुत है- आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । *******
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हम कि रूठी हुई रुत!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में ग़ुलाम अली जी का गाया एक और शेर- हम कि रूठी हुई रुत को भी मना लेते थे!शायर- अहमद फराज गायक- ग़ुलाम अली आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****