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ज़िंदगी का मुक़द्दर!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में निदा फ़ाज़ली जी की ग़ज़ल ‘हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी’ के आखिरी दो शेर निदा फ़ाज़ली जी उर्दू शायरी के बेहतरीन स्तंभ थे।इस ग़ज़ल को जगजीत सिंह-चित्रा सिंह ने गाया थाज़िंदगी का मुक़द्दर सफर दर सफर आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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मैं उस को था पसंद तो !
इस फ़िक्र ही में अपनी तो गुज़री तमाम उम्र,मैं उस को था पसंद तो क्यूँ छोड़ कर गया| शीन काफ़ निज़ाम
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मैं आशिक़ हूँ बहारों का!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- मैं आशिक़ हूँ बहारों का, नज़ारों का, फ़िज़ाओं का इशारों काफ़िल्म- आशिक़मुख्य कलाकार- राज कपूर, पद्मिनी, नंदागीतकार- शैलेंद्र, हसरत जयपुरीसंगीतकार- शंकर जयकिशनगायक- मुकेशप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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इस तपन से जेठ की घबरा गए थे प्रान!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री शिव बहदुर सिंह भदौरिया जी की रचना शेयर कर रहा हूँ। भदौरिया जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत हैं श्री शिव बहदुर सिंह भदौरिया जी का यह गीत– इस तपन से जेठ की घबरा गए थे प्रानपर अचानक याद आया एक गंगा स्नान…
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आँखों में रात ख़्वाब का!
आँखों में रात ख़्वाब का ख़ंजर उतर गया,यानी सहर से पहले चराग़-ए-सहर गया| शीन काफ़ निज़ाम
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ग़ैरों की तरह देखते हैं!
तुम तो फिर ग़ैर हो तुम से तो शिकायत कैसी,मेरे अपने मुझे ग़ैरों की तरह देखते हैं| हिमांशी बाबरा
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अंधों की तरह देखते हैं!
मैं जो देखूँ तो झपकती नहीं आँखें मेरी,और हज़रत मुझे अंधों की तरह देखते हैं| हिमांशी बाबरा
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परिंदों की तरह देखते हैं!
हम को दुनिया ने लकड़हारा समझ रक्खा है,हम तो पेड़ों को परिंदों की तरह देखते हैं| हिमांशी बाबरा
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हर तरफ भागते दौड़ते रास्ते!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में निदा फ़ाज़ली जी की ग़ज़ल ‘हर तरफ हर जगह बेशुमार आदमी’ के शेर जो जगजीत सिंह, चित्रा सिंह ने गाए हैं- हर तरफ भागते दौड़ते रास्ते, हर तरफ आदमी का शिकार आदमी! आशा है आपको ये पसंद आएंगे,धन्यवाद। ******
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बच्चों की तरह देखते हैं!
लोग तो लोग हैं लोगों की तरह देखते हैं,और हम हैं तुझे बच्चों की तरह देखते हैं| हिमांशी बाबरा