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मेरी ज़मीन पे चल तेज़
मेरी ज़मीन पे चल तेज़ तेज़ क़दमों से,फिर उस के बा’द तू जल्वे मिरे ग़ुबार के देख| महशर आफ़रीदी
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रूह से पुकार के देख!
अना का बोझ कभी जिस्म से उतार के देख,मुझे ज़बाँ से नहीं रूह से पुकार के देख| महशर आफ़रीदी
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जिंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं-3
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में कृष्ण बिहारी नूर जी की ग़ज़ल का एक और शेर ‘सच बढ़े या घटे तो सच ना रहे, झूठ की कोई इंतेहा ही नहीं’ आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । ******
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कहीं जो शहर में निकलूँ!
मिरे जुनून को सहरा ही झेल सकता है, कहीं जो शहर में निकलूँ तो क़त्ल-ए-आम करूँ| महशर आफ़रीदी
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खिजां के फूल पे आती कभी बहार नहीं!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मरे स्वर में यह गीत- खिजां के फूल पे आती कभी बहार नहीं, मेरे नसीब में ऐ दोस्त तेरा प्यार नहीं !फिल्म- दो रास्ते मुख्य कलाकार- राजेश खन्ना, मुमताज़गीतकार- आनंद बक्षी संगीतकार- लक्ष्मीकांत प्यारेलाल गायक- किशोर कुमार प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद।…
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भड़का रहे हैं आग!
आज मैं प्रसिद्ध शायर तथा फिल्मी गीतकार साहिर लुधियानवी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। साहिर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं साहिर लुधियानवी जी की यह ग़ज़ल- भड़का रहे हैं आग लब-ए-नग़्मगर से हम ।ख़ामोश क्यों रहेंगे ज़माने के डर से हम । ले…
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तलाश-ए-इश्क़ रुके!
अभी तो दिल की क़यादत में पाँव निकले हैं, तलाश-ए-इश्क़ रुके तो कहीं क़याम करूँ| महशर आफ़रीदी
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ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं -2
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में कृष्ण बिहारी नूर जी की ग़ज़ल का दूसरा शेर, इस ग़ज़ल को जगजीत सिंह जी ने गाया है- इतने हिस्सों में बंट गया हूँ मैं आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । ******
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आहों पे और काम करूँ!
हर एक साँस रगड़ खा रही है सीने में,और आप कहते हैं आहों पे और काम करूँ| महशर आफ़रीदी