Category: Uncategorized
-
दुश्मनी तो क्या रखता!
ज़माना हमसे भला दुश्मनी तो क्या रखता, सो कर गया है हमें पाएमाल* वैसे ही| *बर्बाद अहमद फ़राज़
-
हाथों से ढाल वैसे ही!
मैं रोकना ही नहीं चाहता था वार उसका, गिरी नहीं मिरे हाथों से ढाल वैसे ही| अहमद फ़राज़
-
फेंका था जाल वैसे ही!
हम आ गए हैं तह-ए-दाम* तो नसीब अपना, वगरना उसने तो फेंका था जाल वैसे ही| *Inside the Net अहमद फ़राज़
-
तुम्हारा ख़याल वैसे ही!
चला था ज़िक्र ज़माने की बेवफ़ाई का, सो आ गया है तुम्हारा ख़याल वैसे ही| अहमद फ़राज़
-
जाँ पर वबाल वैसे ही!
तुझे है मश्क़-ए-सितम* का मलाल वैसे ही, हमारी जान थी जाँ पर वबाल वैसे ही| *Cruelty अहमद फ़राज़
-
‘मॉड’ वन!
आज मैं हिन्दी के श्रेष्ठ गीतकार और कुशल मंच संचालक श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| इस गीत में सोम जी ने आधुनिकता के वातावरण का बहुत सुंदर चित्रण किया है| सोम जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर…
-
चाँद सितारे साथ रहे!
हिज्र में शब भर दर्द-ओ-तलब के चाँद सितारे साथ रहे, सुब्ह की वीरानी में यारो कैसे बसर औक़ात करें| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
लहू अपनी गर्दन पे!
क़त्ल-ए-दिल-ओ-जाँ अपने सर है अपना लहू अपनी गर्दन पे, मोहर-ब-लब बैठे हैं किसका शिकवा किसके साथ करें| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
रौशन अपनी रात करें!
शाम हुई फिर जोश-ए-क़दह* ने बज़्म-ए-हरीफ़ाँ**रौशन की, घर को आग लगाएँ हम भी रौशन अपनी रात करें| *शराब पीने का जोश, **जीवन की महफ़िल फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
-
दर्द थमे तो बात करें!
अब जो कोई पूछे भी तो उससे क्या शरह-ए-हालात करें, दिल ठहरे तो दर्द सुनाएँ दर्द थमे तो बात करें| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़