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परेशान किया जाए!
आओ कोई तफ़रीह का सामान किया जाए, फिर से किसी वाइ’ज़ को परेशान किया जाए| क़तील शिफ़ाई
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जो मुमकिन ही नहीं है!
उस चीज़ का क्या ज़िक्र जो मुमकिन ही नहीं है, सहरा में कभी साया-ए-दीवार न माँगो| क़तील शिफ़ाई
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इज़हार न माँगो!
सच बात पे मिलता है सदा ज़हर का पियाला, जीना है तो फिर जीने का इज़हार न माँगो| क़तील शिफ़ाई
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निगाहों का भरम भी!
खुल जाएगा इस तरह निगाहों का भरम भी, काँटों से कभी फूल की महकार न माँगो| क़तील शिफ़ाई
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मुझमें क्या आकर्षण!
आज मैं हिन्दी गीत लेखन और मंचों पर उनकी प्रस्तुति के मामले में अपना अनूठा अंदाज़ रखने वाले स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सरोज जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी का यह नवगीत –…
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मसीहा की नज़र से!
गिर जाओगे तुम अपने मसीहा की नज़र से, मर कर भी इलाज-ए-दिल-ए-बीमार न माँगो| क़तील शिफ़ाई
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तलवार न माँगो!
यारो किसी क़ातिल से कभी प्यार न माँगो, अपने ही गले के लिए तलवार न माँगो| क़तील शिफ़ाई
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ज़ख़्म न जाने मेरे!
चारा-गर* यूँ तो बहुत हैं मगर ऐ जान-ए-‘फ़राज़’, जुज़ तिरे** और कोई ज़ख़्म न जाने मेरे| *Doctors, *ExceptYou अहमद फ़राज़
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अहद-ए-वफ़ा ने मेरे!
तू है किस हाल में ऐ ज़ूद-फ़रामोश* मिरे, मुझको तो छीन लिया अहद-ए-वफ़ा ने मेरे| *भुलक्कड़ अहमद फ़राज़