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अपने तमाशाइयों में हूँ!
ख़ुद ही मिसाल-ए-लाला-ए-सेहरा लहू लहू, और ख़ुद ‘फ़राज़’ अपने तमाशाइयों में हूँ| अहमद फ़राज़
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उसका जन्मदिन!
आज एक बार फिर मैं आधुनिक हिन्दी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| वाजपेयी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता – आज उसका जन्मदिन हैजन्मदिन है असंख्य किसलयों काजो फैलाते हैं उल्लास और ताज़गी…
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तिरे क़हक़हों में हूँ!
तू हँस रहा है मुझ पे मिरा हाल देख कर, और फिर भी मैं शरीक तिरे क़हक़हों में हूँ| अहमद फ़राज़
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तिरी ख़्वाहिशों में हूँ!
मुझ से बिछड़ के तू भी तो रोएगा उम्र भर, ये सोच ले कि मैं भी तिरी ख़्वाहिशों में हूँ| अहमद फ़राज़
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तिरी महफ़िलों में हूँ!
बदला न मेरे बाद भी मौज़ू-ए-गुफ़्तुगू, मैं जा चुका हूँ फिर भी तिरी महफ़िलों में हूँ| अहमद फ़राज़
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इन्ही क़ाफ़िलों में हूँ!
तू लूट कर भी अहल-ए-तमन्ना को ख़ुश नहीं, याँ लुट के भी वफ़ा के इन्ही क़ाफ़िलों में हूँ| अहमद फ़राज़
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कब से उदासियों के!
ऐ यार-ए-ख़ुश-दयार तुझे क्या ख़बर कि मैं, कब से उदासियों के घने जंगलों में हूँ| अहमद फ़राज़
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मैं संग-ए-राह हूँ!
मुझ से गुरेज़-पा है तो हर रास्ता बदल, मैं संग-ए-राह हूँ तो सभी रास्तों में हूँ| अहमद फ़राज़
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तिरे दोस्तों में हूँ!
तेरे क़रीब आ के बड़ी उलझनों में हूँ, मैं दुश्मनों में हूँ कि तिरे दोस्तों में हूँ| अहमद फ़राज़
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बताइए अब क्या करना है!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के विख्यात व्यंग्य काव्य लेखक और कुशल मंच संचालक श्री अशोक चक्रधर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| चक्रधर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता – कि बौड़म जी ने एक ही…