Category: Uncategorized
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वफ़ा ने उजाड़ दी हैं!
बुझा दिए हैं ख़ुद अपने हाथों मोहब्बतों के दिए जला के, मिरी वफ़ा ने उजाड़ दी हैं उमीद की बस्तियाँ बसा के| साहिर लुधियानवी
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जो हादिसा नहीं!
न जाने क्यूँ मुझे लगता है ऐसा हाकिम-ए-शहर, जो हादिसा नहीं पहले हुआ वो अब होगा| शहरयार
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हवा के रुख़ बदलने से!
कोई नहीं है जो बतलाए मेरे लोगों को, हवा के रुख़ के बदलने से क्या ग़ज़ब होगा| शहरयार
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बच्चा!
आज एक बार फिर से मैं हिन्दी साहित्य की सभी विधाओं में उल्लेखनीय योगदान करने वाले श्री रामदरश मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| बच्चे पर यह कविता तीन भाग में लिखी गई है| मिश्र जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री…
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दोस्त यूँ तो सब होगा!
जहाँ में होने को ऐ दोस्त यूँ तो सब होगा, तिरे लबों पे मिरे लब हों ऐसा कब होगा| शहरयार