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ये ज़मीन कितनी सिमट गई
मिरी ज़िंदगी भी मिरी नहीं ये हज़ार ख़ानों में बट गई, मुझे एक मुट्ठी ज़मीन दे ये ज़मीन कितनी सिमट गई| बशीर बद्र
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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-8
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज आठवां दिन है । इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले भी बताया है, हमेशा ‘श्रीकृष्ण शर्मा’ नाम से रचनाएं लिखता रहा, उनका…