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अपने सनम के शैदा!
आलमे दो जहाँ में रोशन हूँ,फिर मुलाक़ात, क्या करे कोई?हम तो अपने सनम के शैदा हैं,होंगे सुक़रात, क्या करे कोई? बलबीर सिंह रंग
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घमघूसर कव्वाल!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में काका हाथरसी जी की एक छोटी सी हास्य कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ- आशा है यहआपको पसंद आएगी,धन्यवाद । ******
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आबोदाना रहे न रहे!
आबोदाना रहे, रहे, न रहे,ये ज़माना रहे, रहे, न रहे।हमने गुलशन की ख़ैर माँगी है,आशियाना रहे, रहे, न रहे। बलबीर सिंह रंग
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ख़ाक-बसर पूछते चलो!
किस मंज़िल-ए-मुराद की जानिब रवाँ हैं हम,ऐ रह-रवान-ए-ख़ाक-बसर पूछते चलो| साहिर लुधियानवी
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तुम अगर मुझको न चाहो तो!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं, अपने स्वर में मुकेश जी का गाया यह प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ- तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं, तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी। आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । ******
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कलम और कुदाली!
आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय रामदरश मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामदरश मिश्र जी की यह कविता– न जाने कब से हाथ में कलम हैवह काग़ज़ पर लिख रही है-ऋतुएँ, पेड़, फूल,…
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उन को भी क्या ख़बर!
जो ख़ुद को कह रहे हैं कि मंज़िल-शनास हैं, उन को भी क्या ख़बर है मगर पूछते चलो| साहिर लुधियानवी
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यारो कोई तो उन की!
हम से अगर है तर्क-ए-तअ’ल्लुक़ तो क्या हुआ,यारो कोई तो उन की ख़बर पूछते चलो| साहिर लुधियानवी