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जितने भी सितम!
हम-सफ़र लैला भी होगी मैं तभी जाऊँगा, मुझ पे जितने भी सितम करने हों सहरा कर ले| मुनव्वर राना
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फिर से ऐ दिल!
मुद्दतों बा‘द वो आएगा हमारे घर में, फिर से ऐ दिल किसी उम्मीद को ज़िंदा कर ले| मुनव्वर राना
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सामने तौबा कर ले!
गर कभी रोना ही पड़ जाए तो इतना रोना, आ के बरसात तिरे सामने तौबा कर ले| मुनव्वर राना
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मातृ वंदना
आज मैं छायावाद युग की प्रमुख कवियित्री स्वर्गीया महादेवी वर्मा जी की एक प्रसिद्ध रचना शेयर कर रहा हूँ| महादेवी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीया महादेवी वर्मा जी की यह रचना – वे मुस्काते फूल, नहींजिनको आता है मुर्झाना,वे तारों के दीप, नहींजिनको भाता है…
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कोई मीठा कर ले!
अब बड़े लोगों से अच्छाई की उम्मीद न कर, कैसे मुमकिन है करैला कोई मीठा कर ले| मुनव्वर राना
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आज तक़ाज़ा कर ले!
आज का काम तुझे आज ही करना होगा, कल जो करना है तो फिर आज तक़ाज़ा कर ले| मुनव्वर राना
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दिल ये इरादा कर ले!
ख़ुद-ब-ख़ुद रास्ता दे देगा ये तूफ़ान मुझे, तुझ को पाने का अगर दिल ये इरादा कर ले| मुनव्वर राना
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वर्ना जो आए समझ में!
अब मुझे पार उतर जाने दे ऐसा कर ले, वर्ना जो आए समझ में तिरी दरिया कर ले| मुनव्वर राना
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कमरे में अँधेरा कर ले!
काले कपड़े नहीं पहने हैं तो इतना कर ले, इक ज़रा देर को कमरे में अँधेरा कर ले| मुनव्वर राना