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नाख़ुदा देख रहा है!
नाख़ुदा देख रहा है कि मैं गिर्दाब में हूँ,और जो पुल पे खड़े लोग हैं अख़बार से हैं| गुलज़ार
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पत्तों में हलचल है!
पेड़ के पत्तों में हलचल है ख़बर-दार से हैं,शाम से तेज़ हवा चलने के आसार से हैं| गुलज़ार
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जिस की फ़ुर्क़त ने!
जिस की फ़ुर्क़त ने पलट दी इश्क़ की काया ‘फ़िराक़’,आज उस ईसा-नफ़स दम-साज़ की बातें करो| फ़िराक़ गोरखपुरी
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दीपक पर परवाने आए!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी गीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी का यह गीत – दीपक पर परवाने आए! अपने पर फड़काते आए,किरणों…
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इश्क़-ए-बे-परवा !
इश्क़-ए-बे-परवा भी अब कुछ ना-शकेबा हो चला,शोख़ी-ए-हुस्न-ए-करिश्मा-साज़ की बातें करो| फ़िराक़ गोरखपुरी
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आज कुछ उस नाज़!
जो हयात-ए-जाविदाँ है जो है मर्ग-ए-ना-गहाँ,आज कुछ उस नाज़ उस अंदाज़ की बातें करो| फ़िराक़ गोरखपुरी
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कुछ फ़ज़ा कुछ!
कुछ क़फ़स की तीलियों से छन रहा है नूर सा,कुछ फ़ज़ा कुछ हसरत-ए-परवाज़ की बातें करो| फ़िराक़ गोरखपुरी
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किसलिए इल्ज़ाम!
किस लिए उज़्र-ए-तग़ाफुल किस लिए इल्ज़ाम-ए-इश्क़,आज चर्ख़-ए-तफ़रक़ा-पर्वाज़ की बातें करो| फ़िराक़ गोरखपुरी
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नाम भी लेना है जिस!
नाम भी लेना है जिस का इक जहान-ए-रंग-ओ-बू,दोस्तो उस नौ-बहार-ए-नाज़ की बातें करो| फ़िराक़ गोरखपुरी
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इश्क़ रुस्वा हो चला!
इश्क़ रुस्वा हो चला बे-कैफ़ सा बेज़ार सा,आज उस की नर्गिस-ए-ग़म्माज़ की बातें करो| फ़िराक़ गोरखपुरी