Category: Uncategorized
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अहकामात जारी हो गए!
रख दिए जाएँगे नेज़े लफ़्ज़ और होंटों के बीच, ज़िल्ल-ए-सुब्हानी के अहकामात जारी हो गए| राहत इंदौरी
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चाँद पागल हो गया!
रौशनी की जंग में तारीकियाँ पैदा हुईं, चाँद पागल हो गया तारे भिकारी हो गए| राहत इंदौरी
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देवता मंदिर से निकले!
देवियाँ पहुँचीं थीं अपने बाल बिखराए हुए, देवता मंदिर से निकले और पुजारी हो गए| राहत इंदौरी
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बाप हाकिम था मगर!
फ़ैसले लम्हात के नस्लों पे भारी हो गए, बाप हाकिम था मगर बेटे भिकारी हो गए| राहत इंदौरी
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एक चिड़िया आई!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि श्री अनूप अशेष जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अनूप अशेष जी की यह कविता – जिस दिन मेरे घरएक चिड़ियाआई पंख फुलाए। मैंने देखा वह दिनमेरे मन…