Category: Uncategorized
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एक वो हैं जिन्हें!
एक वो हैं जिन्हें दुनिया की बहारें हैं नसीब,एक मैं हूँ क़फ़स-ए-तंग को दुनिया समझा| बेख़ुद देहलवी
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ख़ाक का पुतला!
क्या कहूँ मेरे समाने को समझ है दरकार,ख़ाक समझा जो मुझे ख़ाक का पुतला समझा| बेख़ुद देहलवी
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मुझ को तमाशा!
असर-ए-हुस्न कहूँ या कशिश-ए-इश्क़ कहूँ,मैं तमाशाई था वो मुझ को तमाशा समझा| बेख़ुद देहलवी
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नदी बाढ़ के!
आज एक बार फिर मैं, हिन्दी नवगीत के श्रेष्ठ हस्ताक्षर श्री अनूप अशेष जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| अशेष जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अनूप अशेष जी का यह नवगीत – हम सूखे बादल को जीतेकिन दरवाज़ोंदिन आषाढ़ के। अपने भीतर धूप…
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आपने अच्छा समझा!
मैं ये समझा हूँ कि समझे न मिरी बात को आप,सर हिला कर जो कहा आप ने अच्छा समझा| बेख़ुद देहलवी