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सर्कस में बंदर!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज अपने स्वर में शैल चतुर्वेदी जी की एक हास्य कविता का अंश प्रस्तुत कर रहा हूँ 9युट्यूब शॉर्ट में एक मिनट की समय सीमा होती है इसीलिए अंश प्रस्तुत कर पाते हैं)- – आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । ******
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इतनी मुद्दत बाद मिले हो!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं मोहसिन नक़वी जी की लिखी एक प्रसिद्ध ग़ज़ल अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे गुलाम अली जी ने गाया है- इतनी मुद्दत बाद मिले हो, किन सोचों में गुम रहते हो! आशा है आपको यह पसंद आएगी, धन्यवाद। *******
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मेरे देश की आँखें!
आज मैं हिंदी साहित्य के प्रत्येक क्षेत्र में अपना अनूठा योगदान करने वाले श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायनजी अज्ञेय जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। अज्ञेय जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है अज्ञेय जी की यह कविता– नहीं, ये मेरे देश की आँखें…
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सेहत-ए-दिल जो!
रूह को रोग मोहब्बत का लगा देती हैं,सेहत-ए-दिल जो अता करती हैं बीमार आँखें| अली सरदार जाफ़री
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पिंदार-ए-जवानी!
इशवा-ओ-ग़मज़ा-ओ-अंदाज़-ओ-अदा पर नाज़ाँ,अपने पिंदार-ए-जवानी की परस्तार आँखें| अली सरदार जाफ़री
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मुखड़े पे चमकते तारे!
हुस्न के चाँद से मुखड़े पे चमकते तारे,हाए आँखें वो हरीफ़-ए-लब-ओ-रुख़सार आँखें| अली सरदार जाफ़री