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एक चिड़िया आई!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री अनूप अशेष जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। अनूप जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अनूप अशेष जी की यह कविता– जिस दिन मेरे घरएक चिड़ियाआई पंख फुलाए। मैंने देखा वह दिनमेरे मन का…
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लहू हिना नहीं बनता!
सरिश्क रंग न बख़्शे तो क्यूँ हो बार-ए-मिज़ा, लहू हिना नहीं बनता तो क्यूँ बदन में रहे| मजरूह सुल्तानपुरी
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शोख़ की नज़र में खुले!
खुले जो हम तो किसी शोख़ की नज़र में खुले,हुए गिरह तो किसी ज़ुल्फ़ की शिकन में रहे| मजरूह सुल्तानपुरी
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जूता चल गया!
एक पुराने शेर के बहाने, आज के समय पर संक्षिप्त वक्तव्य- आशा है आपको पसंद आएगा,धन्यवाद। *******
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तिरी निगाह का जादू!
मुझे नहीं किसी उसलूब-ए-शाइरी की तलाश,तिरी निगाह का जादू मिरे सुख़न में रहे|‘ मजरूह सुल्तानपुरी
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नादां था बेचारा दिल ही तो है!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से कल मैंने फिल्म- ‘दिल ही तो है’ के लिए इसके शीर्षक से संबंधित एक मस्ती भरा गीत प्रस्तुत किया था, आज उसके विपरीत निराशा और पछतावे से भरा गीत मेरे स्वर में प्रस्तुत है, इस गीत को भी मुकेश जी ने गाया था, लिखा था साहिर लुधियानवी जी ने…
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मिरे जुनूँ की महक!
तू ऐ बहार-ए-गुरेज़ाँ किसी चमन में रहे,मिरे जुनूँ की महक तेरे पैरहन में रहे| मजरूह सुल्तानपुरी
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अंतिम पर्दा – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद…
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हमें शुऊर-ए-जुनूँ है!
हमें शुऊर-ए-जुनूँ है कि जिस चमन में रहे,निगाह बन के हसीनों की अंजुमन में रहे| मजरूह सुल्तानपुरी
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वहीं डाल दी हैं बाँहें!
कभी जादा-ए-तलब से जो फिरा हूँ दिल-शिकस्ता,तिरी आरज़ू ने हँस कर वहीं डाल दी हैं बाँहें| मजरूह सुल्तानपुरी