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दिल्ली में!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की यह कविता – कारों की रेस मेंशामिल बैलगाड़ियाँख़ुश है घोड़ागाड़ियों को देख करसभ्यता का विकास बरकरार है यहाँसर…
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बात क्या फिर कोई!
चल पड़ी रस्म जो कज-फ़हमी* की,बात क्या फिर कोई कर पाएगा| *Misunderstanding क़तील शिफ़ाई
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राणाप्रताप की तलवार!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि तथा अपनी ओजपूर्ण रचनाओं के लिए ख्यातिप्राप्त स्वर्गीय श्यामनारायण पांडेय जी की एक प्रसिद्ध कविता शेयर कर रहा हूँ। इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय श्यामनारायण पांडेय जी की यह कविता – चढ़ चेतक पर तलवार उठा,रखता था भूतल पानी को।राणा…
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आग का दरिया देखूँ|!
टूट जाएँ कि पिघल जाएँ मिरे कच्चे घड़े,तुझ को मैं देखूँ कि ये आग का दरिया देखूँ| परवीन शाकिर
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और भी तुझ सा देखूँ!
तू मिरी तरह से यकता है मगर मेरे हबीब,जी में आता है कोई और भी तुझ सा देखूँ| परवीन शाकिर