Category: Uncategorized
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जैसी तुम्हें दिखाई दी!
चार घरों के एक मोहल्ले के बाहर भी है आबादी,जैसी तुम्हें दिखाई दी है सब की वही नहीं है दुनिया| निदा फ़ाज़ली
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बच्चों के स्कूल में!
जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नहीं है दुनिया,बच्चों के स्कूल में शायद तुम से मिली नहीं है दुनिया| निदा फ़ाज़ली
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दुनिया के मिट जाने!
ख़ुशियों के बटवारे तक ही ऊँचे नीचे आगे पीछे,दुनिया के मिट जाने का डर जितना तेरा उतना मेरा| निदा फ़ाज़ली
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सदियों का इतिहास!
साँसें जितनी मौजें उतनी सब की अपनी अपनी गिनती,सदियों का इतिहास समुंदर जितना तेरा उतना मेरा| निदा फ़ाज़ली
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तुम जानो या मैं जानूँ!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी नवगीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| | शंभुनाथ जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का यह गीत – जानी अनजानी, तुम जानो या मैं जानूँ। यह रात अधूरेपन…
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आँसू सपना चाहत!
हर जीवन की वही विरासत आँसू सपना चाहत मेहनत,साँसों का हर बोझ बराबर जितना तेरा उतना मेरा| निदा फ़ाज़ली
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सब कुछ अंदर बाहर!
गेहूँ चावल बाँटने वाले झूटा तौलें तो क्या बोलें,यूँ तो सब कुछ अंदर बाहर जितना तेरा उतना मेरा| निदा फ़ाज़ली
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दुख सुख का ये जंतर!
एक ही धरती हम सब का घर जितना तेरा उतना मेरा,दुख सुख का ये जंतर-मंतर जितना तेरा उतना मेरा| निदा फ़ाज़ली