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फ़क़ीर कब से खड़ा!
बहुत से और भी घर हैं ख़ुदा की बस्ती में,फ़क़ीर कब से खड़ा है जवाब दे जाओ| बशीर बद्र
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शोहरत की बुलंदी भी!
शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है,जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है| बशीर बद्र
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ख़ुश-रंग परिंदों के!
ख़ुश-रंग परिंदों के लौट आने के दिन आए,बिछड़े हुए मिलते हैं जब बर्फ़ पिघलती है| बशीर बद्र
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यूँ प्यार नहीं छुपता !
यूँ प्यार नहीं छुपता पलकों के झुकाने से,आँखों के लिफ़ाफ़ों में तहरीर चमकती है| बशीर बद्र
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चिलमन सी सरकती!
जब रात की तन्हाई दिल बन के धड़कती है,यादों के दरीचों में चिलमन सी सरकती है| बशीर बद्र
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सचमुच, इधर तुम्हारी याद!
आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि स्वर्गीय त्रिलोचन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| | त्रिलोचन जी का मूल नाम वासुदेव सिंह था| त्रिलोचन जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय त्रिलोचन जी की यह कविता – आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि स्वर्गीय त्रिलोचन जी की…