Category: Uncategorized
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कम-हिम्मती ख़तरा है!
कम-हिम्मती ख़तरा है समुंदर के सफ़र में,तूफ़ान को हम दोस्तो ख़तरा नहीं कहते| नवाज़ देवबंदी
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इक तुम हो कि!
इक हम हैं कि ग़ैरों को भी कह देते हैं अपना,इक तुम हो कि अपनों को भी अपना नहीं कहते| नवाज़ देवबंदी
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मंज़िल पे न पहुँचे उसे
मंज़िल पे न पहुँचे उसे रस्ता नहीं कहते,दो चार क़दम चलने को चलना नहीं कहते| नवाज़ देवबंदी
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हास्य कविता- पापा, आपा!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में, अल्हड बीकानेरी जी की एक हास्य कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ जो उम्र के साथ मोटापा बढने से संबंधित है आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ******
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महक उठे गांव-गांव!
आज एक बार फिर मैं मेरे अत्यंत प्रिय गीतकार स्वर्गीय किशन सरोज जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। किशन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय किशन सरोज जी का यह नवगीत– महक उठे गांव-गांवले पुबांव से पछांवबहक उठे आज द्वार, देहरी अँगनवा ।…