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इतनी शदीद ग़म की!
मैं क्यूँ किसी के अहद-ए-वफ़ा का यक़ीं करूँइतनी शदीद ग़म की ज़रूरत नहीं मुझे एहसान दानिश
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जो कुछ गुज़र रही है!
जो कुछ गुज़र रही है ग़नीमत है हम-नशीं अब ज़िंदगी पे ग़ौर की फ़ुर्सत नहीं मुझे| एहसान दानिश
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मेरी कुछ और रचनाएं-1
एक बार फिर से कुछ पुरानी रचनाएं मिल गईं सोचा इनका भी ढोल पीट लेता हूँ क्योंकि बहुत समय पहले 1980 में दिल्ली छोड़ दी थी और रचनाकर्म भी लगभग छूट ही गया था| अधिकतर सुदूर प्रोजेक्ट्स में रहा और अब 7 से अधिक वर्षों से गोवा में रह रहा हूँ, जहां साहित्यिक सपोर्ट और…
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वो हैं कि इक नज़र!
मैं हूँ कि इश्तियाक़ में सर-ता-क़दम नज़रवो हैं कि इक नज़र की इजाज़त नहीं मुझे एहसान दानिश
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इतना ज़रूर है कि!
ये तो नहीं कि तुम से मोहब्बत नहीं मुझे,इतना ज़रूर है कि शिकायत नहीं मुझे| एहसान दानिश
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अभी ज़माना कहाँ था!
पता नहीं ये परिंदे कहाँ से आ पहुँचे,अभी ज़माना कहाँ था उदास होने का| राहत इंदौरी
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मिरे लबों से तबस्सुम!
मिरे लबों से तबस्सुम मज़ाक़ करने लगा,मैं लिख रहा था क़सीदा उदास होने का| राहत इंदौरी