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हीर से बातें की हैं!
कै़स की लैला या फरहाद की शीरी कह लो,हम नहीं राँझा मगर हीर से बातें की हैं। बलबीर सिंह रंग
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जबकि जल्लाद की!
मौत के डर से मैं खामोश रहूँ, लानत है,जबकि जल्लाद की शमशीर से बातें की हैं। बलबीर सिंह रंग
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तेरे दीदार की क्या!
तेरे दीदार की क्या ख़ाक तमन्ना होगी,ज़िन्दगी भर तेरी तस्वीर से बातें की हैं। बलबीर सिंह रंग
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प्रिये- पत्नी का शरारती सौंदर्य विवरण
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं जैमिनी हरियाणवी जी की यह हास्य कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसमें पत्नी का शरारती सौंदर्य वर्णन किया गया है- आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । ******
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तक़दीर से बातें की हैं!
हमने तन्हाई में जंज़ीर से बातें की हैं,अपनी सोई हुई तक़दीर से बातें की हैं। बलबीर सिंह रंग
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बात निकलेगी तो फिर
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में जगजीत सिंह जी की गायी हुई यह नज़्म प्रस्तुत कर रहा हूँ- बात निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ******
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पर्वत से छन कर झरता है पानी!
आज एक बार फिर मैं हिंदी नवगीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। शंभुनाथ जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शंभुनाथ सिंह जी का यह नवगीत– पर्वत से छन कर झरता है पानी,जी भर कर पियोऔर पियो…
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बन जाए अगर बात!
बन जाए अगर बात तो सब कहते हैं क्या क्या, और बात बिगड़ जाए तो क्या क्या नहीं कहते| नवाज़ देवबंदी
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कम-हिम्मती ख़तरा है!
कम-हिम्मती ख़तरा है समुंदर के सफ़र में,तूफ़ान को हम दोस्तो ख़तरा नहीं कहते| नवाज़ देवबंदी
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इक तुम हो कि!
इक हम हैं कि ग़ैरों को भी कह देते हैं अपना,इक तुम हो कि अपनों को भी अपना नहीं कहते| नवाज़ देवबंदी