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चुनाव के बहाने!
आज हरियाणा चुनावों के बहाने कुछ चर्चा करने का मन हो रहा है| वैसे चुनाव तो उसके साथ ही जम्मू कश्मीर में भी हुए थे, लेकिन वो तो मेरे लिए अलग दुनिया है, कभी वहाँ गया भी नहीं हूँ और वहाँ के राजनैतिक समीकरणों की मुझे अधिक जानकारी नहीं है, जबकि हरियाणा के गुड़गांव में…
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बुरी नज़र से रखो!
है भोला-भाला सा चेहरा अदाएँ भी हैं हसीं,बुरी नज़र से रखो ख़ुद को तुम बचाए हुए| साहिर लखनवी
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बड़े जतन से जिन्हें!
बड़े जतन से जिन्हें मुंतख़ब किया हम ने,वही सिरे से हमीं को हैं क्यों भुलाए हुए| साहिर लखनवी
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मदहोशी में एहसास!
मद-होशी में एहसास के ऊँचे ज़ीने से गिर जाने दे,इस वक़्त न मुझ को थाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है| क़तील शिफ़ाई
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वक़्त नहीं है बातों का !
ये वक़्त नहीं है बातों का पलकों के साए काम में ला,इल्हाम कोई इल्हाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है| क़तील शिफ़ाई
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हताश!
आज एक बार मैं छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ और हिन्दी कविता के विराट पुरुष स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| निराला जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी का यह गीत – जीवन चिरकालिक…
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नज़्ज़ारा दरिया-नोशी!
गो देख चुका हूँ पहले भी नज़्ज़ारा दरिया-नोशी का,एक और सला-ए-आम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है| क़तील शिफ़ाई