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बँसबिट्टी में!
आज एक बार फिर मैं देश के वरिष्ठ और श्रेष्ठ गीत कवि श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| मिश्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी की यह कविता – बँसबिट्टी में कोयल बोलेमहुआ डाल महोखाआया कहाँ बसन्त…
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उसको लिखूँ दिन!
जाने ये कैसा दौर है जिस में जुरअत भी तो मुश्किल है,उस को लिखूँ दिन रात अगर हो रात लिखूँ| जावेद अख़्तर
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अपनी अपनी तारीकी!
अपनी अपनी तारीकी को लोग उजाला कहते हैं,तारीकी के नाम लिखूँ तो क़ौमें फ़िरक़े ज़ात लिखूँ| जावेद अख़्तर
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मेरी क्या औक़ात!
क़ातिल भी मक़्तूल भी दोनों नाम ख़ुदा का लेते थे,कोई ख़ुदा है तो वो कहाँ था मेरी क्या औक़ात लिखूँ| जावेद अख़्तर
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तख़्त की ख़्वाहिश !
तख़्त की ख़्वाहिश लूट की लालच कमज़ोरों पर ज़ुल्म का शौक़,लेकिन उन का फ़रमाना है मैं इन को जज़्बात लिखूँ| जावेद अख़्तर
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कैसे वो सदमात लिखूँ!
किस किस की आँखों में देखे मैं ने ज़हर बुझे ख़ंजर,ख़ुद से भी जो मैं ने छुपाए कैसे वो सदमात लिखूँ| जावेद अख़्तर
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जब भी !
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और समाचार पत्रिका ‘दिनमान’ के संपादक मण्डल में शामिल रहे स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सर्वेश्वर जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की यह कविता – जब…