Category: Uncategorized
-
तज़्किरा है ख़्वाबों का!
अपनी अपनी ताबीरें ढूँढता है हर चेहरा,चेहरा चेहरा पढ़ लीजे तज़्किरा है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर
-
अपना कौन, पराया कौन!
आज एक ग़ज़ल सादर अवलोकनार्थ ग़ज़ल अपना कौन, पराया कौन,यह परिभाषा लाया कौन। रिश्तों की तुरपाई में, अपना स्वत्व गंवाया कौन। सुविधाओं की नदिया में,डूबा कौन, नहाया कौन। इस जुलूस में लोगों के,है अपना हमसाया कौन। विषय नहीं कुछ तर्क नहीं फिर ये बहस बढ़ाया कौन। सत्ता के मदिरालय में,पीकर खूब अघाया कौन। अब तो…
-
अनुपस्थिति!
आज मैं हिंदी की श्रेष्ठ कवियित्री स्वर्गीय कीर्ति चौधरी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। यह कविता अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ में शामिल थी। कीर्ति जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कीर्ति चौधरी जी की यह कविता – सुबह हुई तो, सूरज…
-
हौसला है ख़्वाबों का!
देखें इस कशाकश का इख़्तिताम हो कब तक, जागने की ख़्वाहिश है हौसला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर
-
सिलसिला ख़्वाबों का!
एक शब के टुकड़ों के नाम मुख़्तलिफ़ रखे,जिस्म-ओ-रूह का बंधन सिलसिला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर
-
फ़ासला है ख़्वाबों का!
जागती हक़ीक़त तक रास्ता है ख़्वाबों का,दरमियाँ मिरे उन के फ़ासला है ख़्वाबों का| कृष्ण बिहारी नूर
-
कितना दुश्वार है!
जिस में कुछ क़ब्रें हों कुछ चेहरे हों कुछ यादें हों,कितना दुश्वार है उस शहर से हिजरत करना| लियाक़त जाफ़री
-
अपनी शिकायत!
देख लेना बड़ी तस्कीन मिलेगी तुम को,ख़ुद से इक रोज़ कभी अपनी शिकायत करना| लियाक़त जाफ़री
-
दिल की तख़्ती पे भी!
दिल की तख़्ती पे भी आयात लिखी रहती हैं,वक़्त मिल जाए तो उन की भी तिलावत करना| लियाक़त जाफ़री
-
सुरमई आँख हसीं!
सुरमई आँख हसीं जिस्म गुलाबी चेहरा,इस को कहते हैं किताबत पे किताबत करना| लियाक़त जाफ़री