Category: Uncategorized
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कैफ़ियत दिल की!
कैफ़ियत दिल की सुनाती हुई एक एक निगाह,बे-ज़बाँ हो के भी वो माइल-ए-गुफ़्तार आँखें| अली सरदार जाफ़री
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मन मीन!
आज मैं विख्यात कवि स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ। नवीन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जी की यह कविता – मछली, मछली, कितना पानी? ज़रा बता दो आज,देखूँ, कितने गहरे में है मेरा जीर्ण जहाज़।मन…
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तिरछी नज़रों में वो!
तिरछी नज़रों में वो उलझी हुई सूरज की किरन, अपने दुज़्दीदा इशारों में गिरफ़्तार आँखें| अली सरदार जाफ़री
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शोख़-ओ-शादाब!
शोख़-ओ-शादाब-ओ-हसीं सादा-ओ-पुरकार आँखें,मस्त-ओ-सरशार-ओ-जवाँ बे-ख़ुद-ओ-होशियार आँखें| अली सरदार जाफ़री
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एक मासूम मोहब्बत!
वो मिरी दोस्त वो हमदर्द वो ग़म-ख़्वार आँखें,एक मासूम मोहब्बत की गुनहगार आँखें| अली सरदार जाफ़री
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पलटना चाहें वहाँ से!
न जा कि इस से परे दश्त-ए-मर्ग हो शायद,पलटना चाहें वहाँ से तो रास्ता ही न हो| मुनीर नियाज़ी
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ज़मीं के गिर्द भी पानी!
ज़मीं के गिर्द भी पानी ज़मीं की तह में भी,ये शहर जम के खड़ा है जो तैरता ही न हो| मुनीर नियाज़ी
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दिखाई देता है जो !
निगाह-ए-आईना मालूम अक्स ना-मालूम,दिखाई देता है जो असल में छुपा ही न हो| मुनीर नियाज़ी
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कहीं हवा ही न हो!
सफ़र में है जो अज़ल से ये वो बला ही न हो,किवाड़ खोल के देखो कहीं हवा ही न हो| मुनीर नियाज़ी
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राधिका दिल से – जुमांजी
ऊपर जो शीर्षक दिया गया है उसमें टी वी पर देखे जाने वाले दो कार्यक्रमों के नाम हैं, एक टी वी सीरियल है ‘राधिका दिल से’ जो सोनी टीवी पर आजकल दिखाया जा रहा है और दूसरी एक अमेरिकन फिल्म है ‘JUMANJI’ जिसके शायद तीन भाग दिखाए जा चुके हैं और चौथा भाग रिलीज़ होने…