Category: Uncategorized
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और उस में डूब के!
वो एक झील थी शफ़्फ़ाफ़ नील पानी की,और उस में डूब के ख़ुद को निखार आए हम| अज़हर इक़बाल
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गुलाब चाँदनी-रातों पे!
गुलाब चाँदनी-रातों पे वार आए हम, तुम्हारे होंटों का सदक़ा उतार आए हम| अज़हर इक़बाल
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तुम्हें गले से!
ये ख़ौफ़ है कि रगों में लहू न जम जाए,तुम्हें गले से लगाया नहीं बहुत दिन से| अज़हर इक़बाल
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हर एक शख़्स यहाँ !
हर एक शख़्स यहाँ महव-ए-ख़्वाब लगता है,किसी ने हम को जगाया नहीं बहुत दिन से| अज़हर इक़बाल
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कि हम ने ख़ुद को भी!
ये कैफ़ियत है मेरी जान अब तुझे खो कर,कि हम ने ख़ुद को भी पाया नहीं बहुत दिन से| अज़हर इक़बाल
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चलो कि ख़ाक उड़ाएँ!
चलो कि ख़ाक उड़ाएँ चलो शराब पिएँ,किसी का हिज्र मनाया नहीं बहुत दिन से| अज़हर इक़बाल
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रुलाया नहीं बहुत दिन!
ये बार-ए-ग़म भी उठाया नहीं बहुत दिन से, कि उस ने हम को रुलाया नहीं बहुत दिन से| अज़हर इक़बाल
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राही से!
आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि स्वर्गीय प्रभाकर माचवे जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| माचवे जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय प्रभाकर माचवे जी का यह गीत – इस मुसाफ़िरी का कुछ न ठिकाना भइया !याँ हार बन गया अदना दाना, भइया ।है…
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आदमी को साहब-ए!
झूट बोला है तो क़ाएम भी रहो उस पर ‘ज़फ़र‘, आदमी को साहब-ए-किरदार होना चाहिए| ज़फ़र इक़बाल
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दोस्ती के नाम पर!
दोस्ती के नाम पर कीजे न क्यूँकर दुश्मनी,कुछ न कुछ आख़िर तरीक़-ए-कार होना चाहिए| ज़फ़र इक़बाल