Category: Uncategorized
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टूटी है मेरी नींद मगर!
टूटी है मेरी नींद मगर तुम को इस से क्या,बजते रहें हवाओं से दर तुम को इस से क्या परवीन शाकिर
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फैलेगी यूँ ही शोरिश!
अच्छा है अहल-ए-जौर किए जाएँ सख़्तियाँ,फैलेगी यूँ ही शोरिश-ए-हुब्ब-ए-वतन तमाम| हसरत मोहानी
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गुलज़ार बन गई है !
उस नाज़नीं ने जब से किया है वहाँ क़याम,गुलज़ार बन गई है ज़मीन-ए-दकन तमाम| हसरत मोहानी
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है नाज़-ए-हुस्न से जो!
है नाज़-ए-हुस्न से जो फ़रोज़ाँ जबीन-ए-यार,लबरेज़ आब-ए-नूर है चाह-ए-ज़क़न तमाम| हसरत मोहानी
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बेहोश इक नज़र में !
देखो तो चश्म-ए-यार की जादू-निगाहियाँ,बेहोश इक नज़र में हुई अंजुमन तमाम| हसरत मोहानी
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मधुमय स्वप्न रंगीले!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा नवीन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| नवीन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बालकृष्ण शर्मा नवीन जी की यह कविता- बन-बनकर मिट गए अनेकों मेरे मधुमय स्वप्न रंगीलेभर-भरकर फिर-फिर सूखे हैं…
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दिल ख़ून हो चुका है!
दिल ख़ून हो चुका है जिगर हो चुका है ख़ाक, बाक़ी हूँ मैं मुझे भी कर ऐ तेग़-ज़न तमाम| हसरत मोहानी
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रंगीनियों में डूब गया!
अल्लाह-री जिस्म-ए-यार की ख़ूबी कि ख़ुद-ब-ख़ुद,रंगीनियों में डूब गया पैरहन तमाम| हसरत मोहानी
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सीख लिए हैं चलन!
हैरत ग़ुरूर-ए-हुस्न से शोख़ी से इज़्तिराब,दिल ने भी तेरे सीख लिए हैं चलन तमाम| हसरत मोहानी