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कभी सूली पे चढ़ा हूँ!
हर दौर ने बख़्शी मुझे मेराज-ए-मोहब्बत,नेज़े पे चढ़ा हूँ कभी सूली पे चढ़ा हूँ| नज़ीर बनारसी
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मिल जाऊँगा दरिया में
मिल जाऊँगा दरिया में तो हो जाऊँगा दरिया,सिर्फ़ इस लिए क़तरा हूँ कि दरिया से जुदा हूँ| नज़ीर बनारसी
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बेशक मेरे नसीब पे!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में राना सहरी जी का एक और शेर जिसे जगजीत सिंह जी ने गाया है- बेशक मेरे नसीब पे रख अपना इख्तियार!शायर- राना सहरी गायक- जगजीत सिंह प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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मैं ख़ाक हूँ मैं आग हूँ !
दुनिया का कोई हादसा ख़ाली नहीं मुझ से,मैं ख़ाक हूँ मैं आग हूँ पानी हूँ हवा हूँ| नज़ीर बनारसी
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वो आइना हूँ जो कभी!
वो आइना हूँ जो कभी कमरे में सजा था,अब गिर के जो टूटा हूँ तो रस्ते में पड़ा हूँ| नज़ीर बनारसी
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क्या वह भी अरमान तुम्हारा!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। शास्त्री जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत है स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी का यह गीत- क्या वह भी अरमान तुम्हारा? जो मेरे नयनों के सपने,जो मेरे प्राणों के अपने ,दे-दे कर अभिशाप चले…
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अकेले हैं चले आओ जहाँ हो!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- फिल्म- राजमुख्य कलाकार – राजेश खन्ना, बबीता गीतकार- शमीम जयपुरीसंगीतकार- कल्याणजी आनंदजीगायक- मोहम्मद रफ़ी प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****
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सब एक नज़र फेंक के!
सब एक नज़र फेंक के बढ़ जाते हैं आगे,मैं वक़्त के शो-केस में चुप-चाप खड़ा हूँ| नज़ीर बनारसी
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ताजिर हूँ उजाले का!
क़िंदील समझ कर कोई सर काट न ले आए,ताजिर हूँ उजाले का अँधेरे में खड़ा हूँ| नज़ीर बनारसी