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मैं वो काशी का मुसलमाँ हूँ!
मैं वो काशी का मुसलमाँ हूँ कि जिस को ऐ ‘नज़ीर’,अपने घेरे में लिए रहते हैं बुत-ख़ाने कई| नज़ीर बनारसी
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छेड़ो न मेरी जुल्फें!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- छेड़ो न मेरी जुल्फें सब लोग क्या कहेंगे!फिल्म- गंगा की लहरें गीतकार- मजरुह सुल्तानपुरी संगीतकार- चित्रगुप्त गायक- लता मंगेशकर, किशोर कुमार प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****
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हे पिता!
आज फिर से अपनी बहुत पुरानी ब्लॉग पोस्ट दोहरा रहा हूँ, मई 2017 में जब मैंने ब्लॉग लिखना शुरू किया था, यह और भी पुरानी 8 वीं पोस्ट थी यह, मेरी जीवन यात्रा व्यावहारिक रूप से शाहदरा से शुरू हुई थी और वहीं से ब्लॉग यात्रा भी। लीजिए आज यह पुरानी पोस्ट पढ़ लीजिए, तब…
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एक भी अपना नहीं था!
किस तरह वो दिन भुलाऊँ जिस बुरे दिन का शरीक,एक भी अपना नहीं था और बेगाने कई| नज़ीर बनारसी
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डॉक्टर कुंवर बेचैन जी के गीत मेरे स्वर में
अपने यूट्यूब लाइव के माध्यम से आज मैं डॉक्टर कुंवर बेचैन जी के कुछ गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- आशा है आपको ये पसंद आएंगे,धन्यवाद। *****
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मेरे जाने पहचाने कई!
मुझ को चुप रहना पड़ा सिर्फ़ आप का मुँह देख कर,वर्ना महफ़िल में थे मेरे जाने पहचाने कई| नज़ीर बनारसी
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कुछ पीने वाले उठ गए!
क्या हमारे दौर के कुछ पीने वाले उठ गए,आज ख़ाली क्यों नज़र आते हैं पैमाने कई| नज़ीर बनारसी
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ये रातें ये मौसम नदी का किनारा!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- ये रातें ये मौसम नदी का किनारा ये चंचल हवा फिल्म- दिल्ली का ठगमुख्य कलाकार- किशोर कुमार, नूतन गीतकार- शैलेन्द्र संगीतकार- रवि गायक- आशा भोसले, किशोर कुमार प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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कहाँ से आ गए बादल!
प्रस्तुत है आज की यह रचना, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- रात में जाने कहाँ से आ गए बादलसुबह देखा गगन भर में छा गए बादल। कौन सी बस्ती न जाने छोड़कर आए,यह जगह भी अब न जानेकब तलक भाए, शुष्क धरती रात भर मेंहो गई दलदल। जलधि जल ले साथ चलतेग्रीष्म से लड़नेइंद्र इनको…