Category: Uncategorized
-
तुम आ गए हो, नूर आ गया है!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, ‘आंधी’ फिल्म का लोकप्रिय गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे किशोर कुमार जी और लता मंगेशकर जी ने गाया था और गुलज़ार जी ने लिखा था-तुम आ गए हो नूर आ गया है, नहीं तो चरागों से लौ जा रही थी! आशा है आपको…
-
तुझे अपना समझते हैं!
भुला दीं एक मुद्दत की जफ़ाएँ उस ने ये कह कर,तुझे अपना समझते थे तुझे अपना समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
किसने बाँसुरी बजाई!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। शास्त्री जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी का यह नवगीत– जनम-जनम की पहचानी वह तान कहाँ से आई !किसने बाँसुरी बजाई अंग-अंग फूले कदंब साँस झकोरे झूलेसूखी…
-
न शोख़ी शोख़ है!
न शोख़ी शोख़ है इतनी न पुरकार इतनी पुरकारी, न जाने लोग तेरी सादगी को क्या समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
होश आया मोहब्बत में!
हमारा ज़िक्र क्या हम को तो होश आया मोहब्बत में,मगर हम क़ैस का दीवाना हो जाना समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
वही जीना समझते हैं!
जहाँ की फितरत-ए-बेगाना में जो कैफ़-ए-ग़म भर दें,वही जीना समझते हैं वही मरना समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
ज़िंदा हैं!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपनी ग़ज़ल के कुछ शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ- ऊपर से पर्ची नहीं आई ज़िंदा हैं! आशा है आपको पसंद आएंगे,धन्यवाद। ******
-
मगर ऐ दिल हम इस में!
यही ज़िद है तो ख़ैर आँखें उठाते हैं हम उस जानिब,मगर ऐ दिल हम इस में जान का खटका समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी
-
उमीदों में भी उन की!
उमीदों में भी उन की एक शान-ए-बे-नियाज़ी है,हर आसानी को जो दुश्वार हो जाना समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी