Category: Uncategorized
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दुनिया तुझे बदल देगी!
मैं जानता हूँ कि दुनिया तुझे बदल देगी,मैं मानता हूँ कि ऐसा नहीं ब-ज़ाहिर तू| अहमद फ़राज़
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मिरी मिसाल कि!
मिरी मिसाल कि इक नख़्ल-ए-ख़ुश्क-ए-सहरा हूँ,तिरा ख़याल कि शाख़-ए-चमन का ताइर तू| अहमद फ़राज़
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पेड़
आज फिर से मेरी एक पुरानी रचना प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा पेड़ हमारी आस्थाओं का प्रतिफलन है,पेड़ बनने के लिए ज़रूरी हैकि पहले हम ऐसा बीज हों-जिसे धरती स्वीकार करे,फिर धरती में रचे-बसेरसों-स्वादों, मूल रसायनों से भीहमारा तालमेल हो,तभी हम धरती का सीना चीरकरअपना नाज़ुक सिर, शान से उठा सकेंगे। फिर यहाँ…
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हुई है शाम तो!
हुई है शाम तो आँखों में बस गया फिर तू,कहाँ गया है मिरे शहर के मुसाफ़िर तू| अहमद फ़राज़
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मानी नहीं जाती!
ब-जुज़ दीवानगी वाँ और चारा ही कहो क्या है, जहाँ अक़्ल ओ ख़िरद की एक भी मानी नहीं जाती| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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बहुत जानी हुई सूरत!
मिरी चश्म-ए-तन-आसाँ को बसीरत मिल गई जब से, बहुत जानी हुई सूरत भी पहचानी नहीं जाती| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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आग बहती है यहाँ!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में नीरज जी की हिंदी ग़ज़ल के दो शेर और प्रस्तुत कर रहा हूँ जिनमें इंसानियत का संदेश दिया गया है- आग बहती है यहाँ गंगा में, झेलम में भी! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । ******
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ठुमुक चलत रामचंद्र!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा श्रीरामचरित मानस में बालक श्रीराम जी द्वारा पैदल चलना प्रारंभ करने से संबंधित प्रसिद्ध भजन प्रस्तुत कर रहा हूँ- ठुमुक चलत रामचंद्र बाजत पैजनिया! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । *******
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मेरा कवि ऐसे लोगों का!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। सरोज जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी का यह गीत– मेरा कवि ऐसे लोगों का साथ नहीं देगा कभीजिनके हाथ किया करते…