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वो और हम से पूछे!
वो और हम से पूछे कि ‘बिल्क़ीस’ कुछ तो कह,कम-बख़्त हम कि होश ही अपने बजा न थे| बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन
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तेरे करम के हाथ!
क्यूँ सब्र-आश्ना न हुआ ना-मुराद दिल, तेरे करम के हाथ तो यूँ बे-अता न थे| बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन
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हरगिज़ गिला नहीं है !
हरगिज़ गिला नहीं है कि तू मेहरबाँ न था,कब हम भी अपने आप से बेहद ख़फ़ा न थे| बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन
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दरिया में रह के !
दरिया में रह के कोई न भीगे तो किस तरह,हम बे-नियाज़ तेरी तरह ऐ ख़ुदा न थे| बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन
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रख़्त-ए-सफ़र में!
है बस-कि ख़ाक उड़ाने की आवारगी को खो,रख़्त-ए-सफ़र में घर को भी बाँधे फिरा करो| बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन
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कभी सो लिया करो!
ये बार-ए-ज़ीस्त झेलते रहना है उम्र-भर,अपनी थकन पे टिक के कभी सो लिया करो| बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन
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जीना है ख़ूब औरों की!
जीना है ख़ूब औरों की ख़ातिर जिया करो,इक-आध साँस ख़ुद भी तो लेते रहा करो| बिलक़ीस ज़फ़ीरुल हसन