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जो चाहो अब रंग भरो!
अब तुम सोचो अब तुम जानो जो चाहो अब रंग भरो,हम ने तो इक नक़्शा खींचा इक ख़ाका तय्यार किया| जाँ निसार अख़्तर
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क्या है मेरी बारी में!
आज मैं हिंदी गीत के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। बच्चन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का यह गीत – क्या है मेरी बारी में। जिसे सींचना था मधुजल सेसींचा खारे पानी से,नहीं उपजता…
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दिल का कारोबार!
इश्क़ में क्या नुक़सान नफ़ा है हम को क्या समझाते हो,हम ने सारी उम्र ही यारो दिल का कारोबार किया| जाँ निसार अख़्तर
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दौरे भी तन्हाई के!
हम पर कितनी बार पड़े ये दौरे भी तन्हाई के,जो भी हम से मिलने आया मिलने से इंकार किया| जाँ निसार अख़्तर
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आँखों को ख़ूँ-बार!
क़तरा क़तरा सिर्फ़ हुआ है इश्क़ में अपने दिल का लहू,शक्ल दिखाई तब उस ने जब आँखों को ख़ूँ-बार किया| जाँ निसार अख़्तर
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तेरी सोई आँखों ने तो!
पहले भी ख़ुश-चश्मों में हम चौकन्ना से रहते थे,तेरी सोई आँखों ने तो और हमें होशियार किया| जाँ निसार अख़्तर
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जितने भी बदनाम हुए!
मुद्दत हुई उस जान-ए-हया ने हम से ये इक़रार किया,जितने भी बदनाम हुए हम उतना उस ने प्यार किया| जाँ निसार अख़्तर
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फ़ख़्र करते थे कभी!
अब उन्हें पहचानते भी शर्म आती है हमें,फ़ख़्र करते थे कभी जिन की मुलाक़ातों पे हम| जाँ निसार अख़्तर
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ये है दुबई मरीना!
दुबई में इस बार हम दुबई मरीना गए, जो समुद्र तट पर मानव निर्मित मरीना (वाटरफ्रंट) है जिसमें ऊंची ऊंची आकर्षक इमारतें हैं, बहुत सुंदर नावें, वाटर स्पोर्ट्स हैं, घूमने के लिए भी यह स्थान अत्यंत सुंदर है। इस इलाके में नगर के सबसे महंगे होटल हैं, सामान्य लोग इस क्षेत्र में रहने की सोच…