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आरज़ू यही हसरत!
हर एक लहज़ा यही आरज़ू यही हसरत,जो आग दिल में है वो शेर में भी ढल जाए| उबैदुल्लाह अलीम
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तन्हाइयों में जल जाए!
मैं वो चराग़ सर-ए-रहगुज़ार-ए-दुनिया हूँ,जो अपनी ज़ात की तन्हाइयों में जल जाए| उबैदुल्लाह अलीम
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कि जाने कौन कहाँ!
मोहब्बतों में अजब है दिलों को धड़का सा,कि जाने कौन कहाँ रास्ता बदल जाए| उबैदुल्लाह अलीम
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शारजाह लाइट विलेज
आज हम शारजाह लाइट फेस्टिवल देखने गए, वहाँ भ्रमण के दो चित्र और वहाँ से दुबई वापसी का एक चित्र शेयर कर रहा हूँ – अंतिम चित्र अल फुर्जान मैट्रो स्टेशन का है। ऊपर एक चित्र अल फुर्जान मेट्रो स्टेशन के अंदर का है और अंतिम चित्र घर के भीतर से रात्रि के समय लिया…
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मिले हैं यूँ तो बहुत!
मिले हैं यूँ तो बहुत आओ अब मिलें यूँ भी, कि रूह गर्मी-ए-अनफ़ास से पिघल जाए| उबैदुल्लाह अलीम
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अब इस क़दर भी न!
अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाए,अब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए| उबैदुल्लाह अलीम