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मौसम पर कविता
आज प्रस्तुत है एक कविता, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- किस मौसम पर कविता लिखेंआप ही बताओ जी। गर्मी- जब लू से झुलसकरमरते हैं लोग, जो भी हो, काम पर तो जाना हैवरना कौन देगा मजूरीवहाँ एसी, कूलर की तो बात क्यापंखा भी नहीं होता जी, जहाँ तपती धूप मेंदिहाड़ी पकानी होती है। बरसात पर…
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मुरली सा कोई शख्स!
मुरली सा कोई शख्स बजा जब भी ध्यान में,मेरे बदन की आबो-हवा गोकुली हुई। सूर्यभानु गुप्त
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चुपचाप देखती रही!
लट्टू की तरह घूम के चौराहा सो गया,चुपचाप देखती रही खिड़की खुली हुई। सूर्यभानु गुप्त
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दरिया के पास धूप!
दरिया के पास धूप को बरगद कोई मिला,दरिया के पास धूप ज़रा काकुली हुई। सूर्यभानु गुप्त