Category: Uncategorized
-
कुछ और भी चेहरे!
हम भी तिरी सूरत के परस्तार हैं लेकिन,कुछ और भी चेहरे हमें मर्ग़ूब रहे हैं| जाँ निसार अख़्तर
-
जो दर्द किसी नाम से!
उन को न पुकारो ग़म-ए-दौराँ के लक़ब से,जो दर्द किसी नाम से मंसूब रहे हैं| जाँ निसार अख़्तर
-
लगता है सफ़ीने से!
तूफ़ान की आवाज़ तो आती नहीं लेकिन,लगता है सफ़ीने से कहीं डूब रहे हैं| जाँ निसार अख़्तर
-
गूँज रही हैं पल पल में!
आज पता क्या कौन से लम्हे कौन सा तूफ़ाँ जाग उठे,जाने कितनी दर्द की सदियाँ गूँज रही हैं पल पल में| जाँ निसार अख़्तर
-
प्यार की यूँ हर बूँद!
प्यार की यूँ हर बूँद जला दी मैं ने अपने सीने में,जैसे कोई जलती माचिस डाल दे पी कर बोतल में| जाँ निसार अख़्तर
-
जैसे कोई दीप जला हो!
गोरी इस संसार में मुझ को ऐसा तेरा रूप लगे,जैसे कोई दीप जला हो घोर अँधेरे जंगल में| जाँ निसार अख़्तर
-
प्रारंभ- रवींद्रनाथ ठाकुर – रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…