Category: Uncategorized
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आज पानी गिर रहा है!
आज हिंदी के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी के बारे में बात करने का मन हो रहा है, जिन्हे हम भवानी दादा के नाम से भी याद रखते हैं। मुझे याद है जब मैं दिल्ली में था और मैंने नया-नया ही कविताएं लिखना शुरू किया था तब मै एक गोष्ठी में गया था,…
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आँखों में डोरे गुलाबी!
हैं यूँ मस्त आँखों में डोरे गुलाबी, शराबी के पहलू में जैसे शराबी| नज़ीर बनारसी
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हुजूम-ए-ख़्वाब लिए!
अजब नहीं कहीं ताबीर कोई मिल जाए, भटक रहा हूँ गिरह में हुजूम-ए-ख़्वाब लिए| नज़ीर क़ैसर
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हवाएँ फिरती हैं!
हवाएँ फिरती हैं रस्तों में बाल खोले हुए, ये रात सर पे खड़ी है कोई अज़ाब लिए| नज़ीर क़ैसर