Category: Uncategorized
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तलख़ी-ए-इंकार लिए!
नोक-ए-अबरू में कभी तलख़ी-ए-इंकार लिए,कभी घोले हुए शीरीनी-ए-इक़रार आँखें| अली सरदार जाफ़री
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अपने आप में!
आज मैं फिर से अपनी तरह के अनूठे हिंदी कवि स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। भवानी दादा की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की यह कविता– अपने आप मेंएक ओछी चीज़ है समयचीज़ों को तोड़ने…
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कभी झुकते हुए बादल!
कभी झुकते हुए बादल कभी गिरती बिजली,कभी उठती हुई आमादा-ए-पैकार आँखें| अली सरदार जाफ़री
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दिल्ली तो करोडों !
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं स्वर्गीय अल्हड बीकनेरी जी की एक छोटी सी हास्य कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ- दिल्ली तो करोडों दिल वालों की नगरिया है! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *******
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कभी सहमा हुआ !
कभी ठहरी हुई यख़-बस्ता ग़मों की झीलें,कभी सहमा हुआ सिमटा हुआ इक प्यार आँखें| अली सरदार जाफ़री
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कभी छलकी हुई!
कभी छलकी हुई शर्बत के कटोरों की तरह,और कभी ज़हर में डूबी हुई तलवार आँखें| अली सरदार जाफ़री
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चौदहवीं का चांद हो!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं फिल्म- चौदहवीं का चांद के लिए रफी साहब का गाया यह गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- चौदहवीं का चांद हो, या आफताब हो! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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बे-ज़बाँ हो के भी !
कैफ़ियत दिल की सुनाती हुई एक एक निगाह,बे-ज़बाँ हो के भी वो माइल-ए-गुफ़्तार आँखें| अली सरदार जाफ़री
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शेष!
आज मैं फिर से आधुनिक हिंदी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह छोटी सी कविता– सब-कुछ बीत जाने के बादबचा रहेगा प्रेमकेलि के बाद शैया में पड़ गई सलवटों-सा,मृत्यु…
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तिरछी नज़रों में वो !
तिरछी नज़रों में वो उलझी हुई सूरज की किरन,अपने दुज़्दीदा इशारों में गिरफ़्तार आँखें| अली सरदार जाफ़री