Category: Uncategorized
-
बिछड़ना है तो बिछड़ जा!
बिछड़ना है तो बिछड़ जा इसी दो-राहे पर,कि मोड़ आगे सफ़र में कहीं नहीं आता| शहरयार
-
पांव हुए पत्थर के-2
कल एक नया गीत शेयर किया था, उसी शीर्षक से अपनी एक और नई रचना आज आप सुधीजनों के समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ- कूदे हम खूब कभी कविता की रस्सी,अब तो लगता जैसे पाँव हुए पत्थर के| वह छलांग पहले की कविता में, बाहर भीमित्रों की महफिल में औ घर के अंदर भी, बेफिक्री…