Category: Uncategorized
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ये हौसला भी तो देख!
ग़ुबार-ए-राहगुज़र का ये हौसला भी तो देख,हवा-ए-ताज़ा तिरे साथ चल रहा हूँ मैं| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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तो आज पैरहन!
बुला रहा है मिरा जामा-ज़ेब* मिलने को,तो आज पैरहन-ए-जाँ बदल रहा हूँ मैं|*वस्त्रों में सुसज्जित दिखने वाला इरफ़ान सिद्दीक़ी
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जिसके सम्मोहन में पाग़ल!
आज मैं प्रसिद्ध जनकवि ज़नाब अदम गोंडवी जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। गोंडवी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय अदम गोंडवी जी की यह ग़ज़ल – जिसके सम्मोहन में पाग़ल, धरती है, आकाश भी है ।एक पहेली-सी ये दुनिया, गल्प भी है, इतिहास…
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कि ढल रहा हूँ मैं!
तुझी पे ख़त्म है जानाँ मिरे ज़वाल* की रात, तू अब तुलू** भी हो जा कि ढल रहा हूँ मैं| *अस्त होना, *ऊपर उठना इरफ़ान सिद्दीक़ी
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और पिघल रहा हूँ मैं!
बदन के दोनों किनारों से जल रहा हूँ मैं,कि छू रहा हूँ तुझे और पिघल रहा हूँ मैं| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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आज कल अपना सफ़र!
आज कल अपना सफ़र तय नहीं करता कोई,हाँ सफ़र का सर-ओ-सामान बहुत करता है| इरफ़ान सिद्दीक़ी
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चल हवा!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि तथा मेरे लिए गुरुतुल्य रहे डॉक्टर कुंवर बेचैन जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। बेचैन जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय डॉक्टर कुंवर बेचैन जी का यह गीत- चल हवा, उस ओर मेरे साथ चलचल वहाँ तक जिस जगह…
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नुक़सान बहुत करता है!
रात को जीत तो पाता नहीं लेकिन ये चराग़,कम से कम रात का नुक़सान बहुत करता है| इरफ़ान सिद्दीक़ी