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उन की राजधानी है!
इस तरह मोहब्बत में दिल पे हुक्मरानी है,दिल नहीं मिरा गोया उन की राजधानी है। कैफ़ भोपाली
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दीवार की मरम्मत
आज एक पुरानी पोस्ट दोहराने का दिन है। आज मैं विख्यात अंग्रेजी कवि श्री रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- दीवार की मरम्मत ऐसा कुछ है, जो दीवार को पसंद नहीं करता,वह, उसके नीचे जमी…
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बूढ़े बरगद आज तुझे!
तेरी लटों में सो लेते थे बे-घर आशिक़ बे-घर लोग,बूढ़े बरगद आज तुझे भी काट गिराया लोगों ने। कैफ़ भोपाली
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हो गई है पीर पर्बत!
आज मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से एक बार फिर से, अपने स्वर में दुष्यंत कुमार जी की यह प्रसिद्ध ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ- हो गई है पीर पर्बत सी पिघलनी चाहिए! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *****
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देस छुड़ाया लोगों ने!
हम को दिवाना जान के क्या क्या ज़ुल्म न ढाया लोगों ने,दीन छुड़ाया धर्म छुड़ाया देस छुड़ाया लोगों ने। कैफ़ भोपाली
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रंज़िश ही सही!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर मेंअहमद फराज़ साहब की लिखी यह ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मेहदी हसन जी ने गाया है- रंज़िश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *******
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उस पार!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नेपाली जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की यह कविता – उस पार कहीं बिजली चमकी होगीजो झलक उठा है मेरा भी आँगन ।…
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फिर रस्ते को रस्ते भर!
जब ‘शारिक़’ पहचान गए मंज़िल की हक़ीक़त,फिर रस्ते को रस्ते भर उलझाया हम ने| शारिक़ कैफ़ी
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दुनिया के कच्चे रंगों!
दुनिया के कच्चे रंगों का रोना रोया,फिर दुनिया पर अपना रंग जमाया हम ने| शारिक़ कैफ़ी
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इन लम्हों में किसकी!
इन लम्हों में किसकी शिरकत कैसी शिरकत,उसे बुला कर अपना काम बढ़ाया हम ने| शारिक़ कैफ़ी