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तुम्हें क्यूँकर बताएँ !
तुम्हें क्यूँकर बताएँ ज़िंदगी को क्या समझते हैं,समझ लो साँस लेना ख़ुद-कुशी करना समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी
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झुक के पानी माँगने वाले!
लगाएँ जो सरों की बाज़ियाँ ये काम उन का है,इमामत क्या करेंगे झुक के पानी माँगने वाले। मंज़र भोपाली
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न मुंह छुपा के जियो!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में, हमराज़ फिल्म का यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे साहिर लुधियानवी जी ने लिखा था और रवि जी के संगीत निर्देशन में महेंद्र कपूर जी ने गाया था- न मुंह छुपा के जियो, और न सर झुका के जियो! आशा है आपको यह…
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अगर तुम्हें नींद नहीं आ रही!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय चंद्रकांत देवताले जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।देवताले जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय चंद्रकांत देवताले जी की यह कविता – अगर तुम्हें नींद नहीं आ रहीतो मत करो कुछ ऐसाकि जो किसी तरह सोए हैं उनकी नींद हराम…
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यहाँ तो सबकी ख़्वाहिश!
यहाँ तो सब की ख़्वाहिश एक सी है रोटियाँ, सिक्केमेरे युग में नहीं ख़्वाब-ए-जवानी माँगने वाले। मंज़र भोपाली
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तरसते हैं बहुत से लोग!
ख़ुदा ने मुझ को बिन-माँगे ये नेमत दी है ‘मंज़र’,तरसते हैं बहुत से लोग ममता देखने को। मंज़र भोपाली
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कमानों में खिंचे हैं!
कमानों में खिंचे हैं तीर तलवारें हैं चमकी,ज़रा ठहरो कहाँ जाते हो दरिया देखने को। मंज़र भोपाली
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बहेलिए
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरी कविता बहेलिए जो राजनीतिज्ञों की लालच देकर वोट पाने और उसके बाद जनता को भूल जाने की प्रवृत्ति पर आधारित है- बहेलिए – मेरी एक कविता आशा है आपको यह कविता पसंद आएगी,धन्यवाद। ******
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बहुत से आइना-ख़ाने!
बहुत से आइना-ख़ाने हैं इस बस्ती में लेकिनतरसती है हमारी आँख चेहरा देखने को। मंज़र भोपाली