Category: Uncategorized
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मेरी दुनिया में!
फ़ित्ना-ए-अक़्ल के जूया मिरी दुनिया से गुज़र,मेरी दुनिया में मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं| जाँ निसार अख़्तर
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मय-कशी अब मिरी !
मय-कशी अब मिरी आदत के सिवा कुछ भी नहीं,ये भी इक तल्ख़ हक़ीक़त के सिवा कुछ भी नहीं| जाँ निसार अख़्तर
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कि मातम आ गया!
न शम्अ है न परवाने ये कैसा रंग-ए-महफ़िल है,कि मातम आ गया शहनाइयों तक तुम नहीं आए| बलबीर सिंह रंग
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समापन हो गया!
समापन हो गया नभ में सितारों की सभाओं का,उदासी आ गई अंगड़ाइयों तक तुम नहीं आए| बलबीर सिंह रंग
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मैं पल दो पल का शायर हूँ!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- कभी कभी के लिए मुकेश जी का गाया यह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- मैं पल दो पल का शायर हूँ, पल दो पल मेरी कहानी है। आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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किसी को देखते ही!
किसी को देखते ही आप को आभास होता है,निगाहें आ गईं परछाइयों तक तुम नहीं आए| बलबीर सिंह रंग
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गृहस्थ!
आज एक बार फिर मैं वरिष्ठ नवगीतकार श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत – प्राण-प्रतिष्ठा कर दी मैंनेसारे देवों के विग्रह मेंफिर भी मूक-बधिर-अन्धे बनवे सब मन्दिर में…
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नदी के हाथ निर्झर!
नदी के हाथ निर्झर को मिली पाती समुंदर को, सतह भी आ गई गहराइयों तक तुम नहीं आए| बलबीर सिंह रंग
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धरा पर थम गई आँधी!
धरा पर थम गई आँधी गगन में काँपती बिजली,घटाएँ आ गईं अमराइयों तक तुम नहीं आए| बलबीर सिंह रंग
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ज़माना आ गया!
ज़माना आ गया रुस्वाइयों तक तुम नहीं आए,जवानी आ गई तन्हाइयों तक तुम नहीं आए| बलबीर सिंह रंग