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ज़िंदा हैं!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपनी ग़ज़ल के कुछ शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ- ऊपर से पर्ची नहीं आई ज़िंदा हैं! आशा है आपको पसंद आएंगे,धन्यवाद। ******
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मगर ऐ दिल हम इस में!
यही ज़िद है तो ख़ैर आँखें उठाते हैं हम उस जानिब,मगर ऐ दिल हम इस में जान का खटका समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी
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उमीदों में भी उन की!
उमीदों में भी उन की एक शान-ए-बे-नियाज़ी है,हर आसानी को जो दुश्वार हो जाना समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी
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मेरे देश की धरती सोना उगले!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं, अपने स्वर में, देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण उपकार फिल्म का प्रसिद्ध गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे महेंद्र कपूर जी ने गाया था- मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******
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अक्षरों की अर्चना!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय चंद्रसेन विराट जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। विराट जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय चंद्रसेन विराट जी की यह ग़ज़ल – आयु भर हम अक्षरों की अर्चना करते रहें.छंद में ही काव्य की नव सर्जना करते रहें..…
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शायद भेस बदला है!
कहाँ का वस्ल तन्हाई ने शायद भेस बदला है, तिरे दम भर के मिल जाने को हम भी क्या समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी
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बस इतने पर हमें सब!
बस इतने पर हमें सब लोग दीवाना समझते हैं,कि इस दुनिया को हम इक दूसरी दुनिया समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी
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निगाह-ए-यार तुझको
किसी बदमस्त को राज़-आश्ना सब का समझते हैं,निगाह-ए-यार तुझ को क्या बताएँ क्या समझते हैं| फ़िराक़ गोरखपुरी
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हर एक मुक़ाम पे!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरा एक मुक्तक- हर एक मुक़ाम पे ठहरा, झुका, सलाम किया! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******